भावनाओं को समझो और महसूस करो


भावनाओं को समझो और महसूस करो

भावनाओं को समझो और महसूस करो – Bhavnao ko samjho aur mehsoos karo “स्टेच्यू स्टेच्यू खेलते खेलते हम इंसान कब पत्थर का बन गए पता ही नहीं चला” आजकल एक डायलॉग बहुत सुनने को मिलता है कि लोगो में फीलिंग्स ही नही रहीं .. यही डायलॉग मैने भी आज मार्किट जाते समय महसूस किया वाकई …

भावनाओं को समझो और महसूस करो
कल मार्किट से आते वक्त देखा कि लोगो में होड लगी है आगे निकलने की अगर कोई अपनी कार बैक भी कर रहा है तो इतना सब्र भी नही है कि एक पल रुक जाए … और कही टक्कर हो गई तो लडने झगडने मारने पर उतारु हो जाते है फीलिंग्स ही नहीं रहीं … भावनाए ही नही रहीं …
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